शीर्षक – ‘मृत्यु एक अटल सत्य’

मौत क्या है ? ये मैं कभी नहीं जानती थी | मौत का नाम कई बार हम लेते हैं और सुनते हैं , परंतु मौत का अर्थ , जीवन की क्षणभंगुरता केवल तभी पता चलती है जब कोई अपना अज़ीज मौत के गले लगता है , तब न जाने क्यों देवकी नन्दन द्वारा दिया  जाने वाला गीता का उपदेश समझ आने लगता है| वास्तव में मौत ही एक ऐसी चीज़ है जो मनुष्य को पशुता से दूर करती है | मौत जैसी घटना ही मनुष्य को मनुष्य होने के सभी अधिकार बताती है | मृत्यु दुनिया का सबसे बड़ा सत्य है , जिसे कोई नहीं टाल सकता | अपने किसी करीबी की मृत्यु हो जाने पर मन में भ्रातृत्व की भावना जागृत होती है | मन में कुछ ऐसे विचार आते हैं कि  सबसे प्रेम पूर्वक व्यवहार करो , क्या पता किसका , कब हमसे  या हमारा इन सब से  साथ छूट जाए कोई नहीं जानता | मृत्यु एक ऐसा सत्य है जो नास्तिक को आस्तिक बनाती है |ये बात सही है कि ज़िंदगी को जिंदादिली से जीना चाहिए परंतु यह बात भी अपने स्मृति-पटलपर रखनी चाहिए कि – ज़िंदगी बेवफा है न जाने कब साथ छोड़ जाए परंतु मौत वफादार है वह कभी साथ नहीं छोड़ेगी , एक न एक दिन वह (मौत) ज़रूर आपको अपनाएगी | अगर हम मौत की सच्चाई से हर पल रूबरू रहते हैं तो कभी किसी से कोई छल -कपट कर ही नहीं सकते इसलिए जीते जी सबके दिलों की धड़कन बन जाओ | ऐसा कुछ कर जाओ कि मृत्यु  के बाद सबके दिलों में अमर रह सको | मनुष्यता ही मनुष्य की गाढ़ी कमाई है | अपनी इस कमाई से तिजोरी भर लो | इस स्थिति में ये पंक्तियाँ कितनी सार्थक प्रतीत होती हैं —-
“ सज-धज कर जिस दिन मौत की शहज़ादी आएगी ,
ना सोना काम आएगा ,ना चाँदी आएगी |”

(स्वाति पंडित)

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *